Saturday, 12 November 2011

हर सुबह इस शिव मंत्र का ध्यान देता है भरपूर मानसिक शक्ति




सफलता के लिये मात्र सही वक्त, साधन या धन ही महत्वपूर्व नहीं होते, बल्कि इच्छाशक्ति और मनोबल का सकारात्मक होना भी निर्णायक होता है। यह तभी संभव है जब इंसान सच्चाई और निष्ठा के साथ अपने नियत लक्ष्य पाने को लेकर हर तरह से समर्पित रहे।

धार्मिक उपायों में भगवान शिव की भक्ति ऐसी ही प्रेरणा देकर न केवल मन को ऊर्जावान, मजबूत बनाने वाली, बल्कि संकल्प को पूरा करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाली भी मानी गई है। क्योंकि शिव चरित्र जीवन में छुपा वैभव के साथ वैराग्य, संहार के साथ कल्याण का भाव जीवन के यथार्थ से जोड़कर रखता है।

ऐसे ही कल्याणकारी देवता भगवान शिव की पूजा के लिए शास्त्रों में बताए एक विशेष मंत्र का स्मरण हर रोज सुबह खासतौर पर सोमवार या शिव तिथियों जैसे अष्टमी आदि पर किया जाए तो इसके प्रभाव से भरपूर मानसिक शक्ति मिलने के साथ जीवन तनाव, दबाव व परेशानियों मुक्त रहता है। जानते हैं यह विशेष शिव मंत्र -

प्रात: शिवलिंग या शिव की मूर्ति पर पवित्र जल स्नान कराकर चंदन, अक्षत व बिल्वपत्र अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखें शिव मंत्र का ध्यान करें -

शान्ताकारं शिखरशयनं नीलकण्ठं सुरेशं।

विश्वाधारं स्फटिकसदृशं शुभ्रवर्णं शुभाङ्गम्।।

गौरीकान्तं त्रितयनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं।

वन्दे शम्भुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।


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छठ पूजा की शाम बोलें यह संकटमोचक यमराज मंत्र


हिन्दू धर्म में जहां यमराज को मृत्य यानी काल का देवता माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक यम का देवत्व रुप धर्मराज और पितृत्व रुप यमराज होता है। इसलिए कार्तिक माह में यम पूजा व दीपदान हर भय, चिंता, रोग कष्ट से मुक्त करने वाला माना गया है।

इसी माह की कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी सूर्य षष्ठी पर भी यमदेव का स्मरण संकटमोचक होता है। क्योंकि शास्त्रों में यमदेव सूर्य पूत्र बताए गए हैं। यम और सूर्य दोनों का संबंध काल से हैं। व्यावहारिक नजरिए से भी बुरे वक्त से बचने के लिए यम पूजा शुभ फल देती है।

खासतौर पर घर-परिवार, रिश्तों और जीवन को दीर्घ और संकटमुक्त रखने रखने के लिए इस दिन यम का विशेष मंत्र से स्मरण और दीप प्रज्जवलन का महत्व है। जानते हैं यमदेव की सरल पूजा विधि और विशेष मंत्र  -

यमदेव की सरल पूजा विधि -

- शाम को यम तर्पण या यम उपासना करें। यम तर्पण में नदी या तीर्थ में दक्षिण दिशा में मुंह कर हथेलियों में जल, तिल और कुश लेकर नम: यमाय या नम: धर्मराजाय बोलकर जल छोड़ें। इस दिन जनेऊधारी हो तो जनेऊ को माला की तरह पहने और काले, सफेद तिलों को उपयोग में लें।

- इसी तरह शाम को तिल के तेल से भरे 5 या 11 दीपक जलाकर उसकी गंध, अक्षत, पुष्प से पूजा करें और दक्षिण दिशा में मुंह करके यमदेवता का ध्यान कर मंदिर या तीर्थ में दीपदान करें। साथ ही नीचे लिखें यम गायत्री मंत्र का यथाशक्ति या कम से कम 108 बार स्मरण करें -

ऊँ सूर्यपुत्राय धीमहि

महाकालाय धीमहि

तन्नो यम: प्रचोदयात्।।

- यमदेवता की आरती कर काल, भय व रोग मुक्ति की कामना करें।
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सफलता चाहिए तो अवश्य करें यह उपाय

जीवन में सफलता के क्या माएने होते हैं यह वही इंसान बता सकते है जिसने कभी सफलता या असफलता का स्वाद चखा हो। सफलता पाने की इच्छा तो हर कोई रखता है लेकिन यह सबके नसीब में नहीं होती। यदि आप किसी कार्य में सफल होने चाहते हैं तो उसके लिए नीचे लिखा उपाय करें-

उपाय

बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पश्चिम दिशा में मुख करके बैठ जाएं और सामने बाजोट(पटिए) पर लाल कपड़ा बिछकर उस पर गेहूं से स्वस्तिक बनाएं। इस स्वस्तिक पर एक थाली रखकर उस पर गं लिखें। अब इस गं अर्थात गणेशजी के बीज मंत्र की पूजा कर इसके ऊपर श्वेतार्क गणपति एवं एक लघु नारियल रख दें। लघु नारियल व श्वेतार्क गणपति स्थापित कर उसके आस-पास गोलाकार घेरे के समान 7 बिंदिया कुंकुम की लगाएं एवं नीचे लिखे मंत्र को जपते हुए उस पर एक-एक लक्ष्मी कारक कौड़ी रख दें।

मंत्र- ऊँ सर्व सिद्धि प्रदोयसि त्वं सिद्धि बुद्धिप्रदो भव: श्री

अब सभी कौडिय़ों पर कुंकुम व चंदन से तिलक करें, चावल चढ़ाएं, फूल चढ़ाएं। अगले दिन किसी कुंवारी कन्या को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा देकर विदा करें। श्वेतार्क गणपति को पूजन स्थान पर स्थापित करें। कौडिय़ों एवं लघु नारियल को उसी वस्त्र में बांधकर जल में प्रवाहित कर दें।

चाहते हैं पैसा बढ़े और बचत भी..तो बोलें यह देवी मंत्र

पैसा यानी द्रव्य मुद्रा, लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। यह जीवन में अनेक विषय और कामनाओं की पूर्ति के लिये किए जाने वाले हर कर्म की गति को बरकरार रखता है। इसलिए जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने लिए धन अर्जन यानी अर्थ प्राप्ति धर्म माना गया है।

अगर आप भी धन प्राप्ति के रूप में ऐसे ही धर्म पालन में कठिनाई का सामना कर रहें हैं या परिवार, कारोबार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आमदनी कम और खर्चा अधिक होने की समस्या से जूझ रहे हैं तो दुर्गा सप्तशती के इस देवी मंत्र का ध्यान शुक्रवार या नवमी तिथि की शाम देवी की लाल चंदन, लाल फूल, नैवेद्य अर्पण व धूप-दीप के साथ पंचोपचार पूजा के बाद आर्थिक संकट दूर करने की कामना के साथ जरूर करें -

करोतु सा न: शुभहेतुरीश्वरी

शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद:।

- अंत में देवी की धूप व दीप आरती करें व धनलाभ की कामना करें। धार्मिक दृष्टि से यह देवी मंत्र विशेष बड़ा ही मंगलकारी व संकटनाशक माना गया है।

मंत्र, जो दिलाता है सुंदर पत्नी

सभी युवकों की इच्छा होती है कि उनकी जीवन संगिनी सुंदर व सुशील हो। जो पूरे परिवार की चहेती बने और सबका मन जीत ले। उसका संपूर्ण व्यक्तित्व सुंदरता का आइना हो। क्या आप भी इन्हीं गुणों से युक्त जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं तो दुर्गासप्तशती के अर्गला स्त्रोत का 24 वां श्लोक आपकी इस समस्या का तुरंत निदान कर सकता है। यह मंत्र बहुत चमत्कारी है तथा भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करता है।

मंत्र

पत्नीं मनोरमां देहि  मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।



कैसे करें जप?

प्रात:काल जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र की प्रतिदिन 5 माला जप करने से सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।

शंख की पूजा करें मार्गशीर्ष में, मिलेंगे मनोवांछित फल

  शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण का स्वरूप कहे जाने वाले माह मार्गशीर्ष (अगहन) का प्रारंभ 11 नवंबर, शुक्रवार को हो चुका है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस मास में शंख की पूजा का विशेष महत्व है। साधारण शंख को श्रीकृष्ण के पंचजन्य शंख के समान समझकर उसका पूजन करने से सभी मनोवांछित फल प्राप्त हो जाते हैं।

शंख पूजा का महत्व

सभी वैदिक कार्यों में शंख का विशेष स्थान है। शंख का जल सभी को पवित्र करने वाला माना गया है, इसी वजह से आरती के बाद श्रद्धालुओं पर शंख से जल छिड़का जाता है। साथ ही शंख को लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है, इसकी पूजा महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली होती है। इसी वजह से जो व्यक्ति नियमित रूप से शंख की पूजा करता है उसके घर में कभी धन अभाव नहीं रहता। ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन के समय शंख भी प्रकट हुआ था। विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है।



पंचजन्य पूजन मंत्र

पंचजन्य की पूजा भी भगवान श्रीहरि की आराधना के समान ही पुण्य देने वाली मानी गई है। विधि-विधान से इस माह शंख की पूजा की जानी चाहिए। जिस प्रकार सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, वैसे ही शंख का भी पूजन करें। अर्चना करते समय इस मंत्र का जप करें-



त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे।

निर्मित: सर्वदेवैश्च पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते।

तव नादेन जीमूता वित्रसन्ति सुरासुरा:।

शशांकायुतदीप्ताभ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते॥

પ્રેમમાં સફળતા મેળવવા માટેના આ છે અચૂક ઉપાયો

યુવાવસ્થામાં પ્રવેશ કરતાં જ યુવક- યુવતીઓમાં પરસ્પર આકર્ષણ સ્વાભાવિક છે. ક્યારેક – ક્યારેક આ આકર્ષણ પ્રેમમાં પલટાઇ જાય છે. પ્રેમ, મનુષ્યને ભગવાને આપેલી સૌથી સુંદર ભેંટ છે. જો પ્રેમ મર્યાદાની હદમાં રહી કરવામાં આવે તો તેમાં કોઇ દોષ નથી. નિ:સ્વાર્થ પ્રેમ જ સાચ્ચો પ્રેમ છે. જો તમે પણ કોઇને સાચો પ્રેમ કરતા હો અને પોતાના પ્રેમમાં સફળતા ચાહતા હો તો આ ઉપાય કરો.

ઉપાય

1- પ્રેમી યુગલને શનિવાર અને અમાસના દિવસે મળવું જોઇએ નહીં. આ દિવસોમાં મળવાથી એકબીજા પ્રત્યેનું આકર્ષણ ઓછુ થાય છે તે સાથે પ્રેમમાં સફળતા મળવાનો પણ સંદેહ રહે છે.

2 – પ્રેમી યુગલે એવો પ્રયાસ કરવો જોઇએ કે જે શુક્રવારે પૂનમના દિવસ હો ત્યારે ચોક્કસ મળે કારણ કે આ દિવસ અત્યંત શુભ હોય છે આ દિવસે મળવાથી પ્રેમ અને આકર્ષણ વધે છે.

3 – કન્યાએ પોતાના હાથમાં લીલી બંગડીઓ પહેરવી તથા પ્રત્યેક શુક્રવારનાં સફેદ વસ્ત્ર પહેરવા.

4 – યુવાનોએ પોતે પન્ના (એમરલ્ડ)ની વીંટી ધારણ કરવી જોઇએ.

5 – યુવાનોએ દરરોજ નીચે લખેલા મંત્રનો વિધિવિધાનથી જાપ કરવો જોઇએ -

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

6 – યુવતીઓએ પણ દરરોજ નીચે લખેલા મંત્રનો વિધિવિધાનથી જાપ કરવો જોઇએ -

ओम् कात्यायानी महाभागे महायोगिन्यधीश्वरीं।

नन्द गोप सुतं देवि पतिं में कुरुते नम:।!