सभी युवकों की इच्छा होती है कि उनकी जीवन संगिनी सुंदर व सुशील हो। जो पूरे परिवार की चहेती बने और सबका मन जीत ले। उसका संपूर्ण व्यक्तित्व सुंदरता का आइना हो। क्या आप भी इन्हीं गुणों से युक्त जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं तो दुर्गासप्तशती के अर्गला स्त्रोत का 24 वां श्लोक आपकी इस समस्या का तुरंत निदान कर सकता है। यह मंत्र बहुत चमत्कारी है तथा भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करता है।
मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।
कैसे करें जप?
प्रात:काल जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र की प्रतिदिन 5 माला जप करने से सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।
मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।
कैसे करें जप?
प्रात:काल जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र की प्रतिदिन 5 माला जप करने से सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।
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