Saturday, 12 November 2011

मृत संजीवनी है यह महामंत्र



धार्मिक दृष्टि से महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना से संकट मुक्ति का सबसे सिद्ध मंत्र माना जाता है। इस मंत्र के प्रभाव से अकाल मृत्यु और मृत्यु भय से रक्षा होती है। साथ ही इससे संतान, धन, यश और सुख-समृद्धि भी मिलती है। पारिवार भी रोग और शत्रु भय से मुक्त होता है। इस मंत्र जप के धार्मिक पक्ष से अलग जाकर विचार करें तो आखिर इस मंत्र के जप से रोग, भय कैसे दूर होते हैं। जानते हैं इसके पीछे छुपे विज्ञान को -

व्यावहारिक दृष्टि से इस मंत्र जप का विज्ञान यही है कि चूंकि मंत्र का मूल अर्थ होता है मनन और चिंतन। जब रोगी, दु:खी, पीडि़त व्यक्ति पूरी आस्था, विश्वास और लीन होकर अपने इष्ट के मंत्र जप करता है। तब ईश्वर के मनन के दौरान मिली सकारात्मक ऊर्जा उसके मन को चिंता, दु:ख और परेशानी से दूर ले जाती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही वह जीवन में नई ऊर्जा, उमंग और उत्साह महसूस करता है। इस दौरान परिवार, मित्रों और आत्मीयजनों का प्रेम, स्नेह और सहयोग हर तरह के संकट से बाहर निकाल देता है और जीवन जीने की नई दिशा मिल जाती है।

वास्तव में शरीर की आंतरिक और बाहरी शक्तियों का मजबूत और सक्रिय होना ही जीवन है। किंतु यही शक्तियाँ जब कमजोर होकर निष्क्रिय हो जाती है तो मृत्यु का कारण बनती है। महामृत्युंजय मंत्र इन शक्तियों को मानसिक और व्यावहारिक रुप से सबल बनाकर जीवन को गति देता है। यह कारण ही इस मंत्र के शास्त्रों में दिए गए मृत संजीवनी मंत्र नाम को सार्थक करता है।

इसलिए महामृत्युंजय मंत्र का जप आप स्वयं करें या आपके लिए परिवार के अन्य सदस्य कराएं। सृष्टि के नियम और अटल मृत्यु को ध्यान में रखकर विचार किया जाए तो भौतिक सुख को पाने और दु:खों के शमन के लिए यह मंत्र निश्चित रुप से शुभ फल देने वाला है।

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