Saturday, 12 November 2011

हर सुबह इस शिव मंत्र का ध्यान देता है भरपूर मानसिक शक्ति




सफलता के लिये मात्र सही वक्त, साधन या धन ही महत्वपूर्व नहीं होते, बल्कि इच्छाशक्ति और मनोबल का सकारात्मक होना भी निर्णायक होता है। यह तभी संभव है जब इंसान सच्चाई और निष्ठा के साथ अपने नियत लक्ष्य पाने को लेकर हर तरह से समर्पित रहे।

धार्मिक उपायों में भगवान शिव की भक्ति ऐसी ही प्रेरणा देकर न केवल मन को ऊर्जावान, मजबूत बनाने वाली, बल्कि संकल्प को पूरा करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाली भी मानी गई है। क्योंकि शिव चरित्र जीवन में छुपा वैभव के साथ वैराग्य, संहार के साथ कल्याण का भाव जीवन के यथार्थ से जोड़कर रखता है।

ऐसे ही कल्याणकारी देवता भगवान शिव की पूजा के लिए शास्त्रों में बताए एक विशेष मंत्र का स्मरण हर रोज सुबह खासतौर पर सोमवार या शिव तिथियों जैसे अष्टमी आदि पर किया जाए तो इसके प्रभाव से भरपूर मानसिक शक्ति मिलने के साथ जीवन तनाव, दबाव व परेशानियों मुक्त रहता है। जानते हैं यह विशेष शिव मंत्र -

प्रात: शिवलिंग या शिव की मूर्ति पर पवित्र जल स्नान कराकर चंदन, अक्षत व बिल्वपत्र अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखें शिव मंत्र का ध्यान करें -

शान्ताकारं शिखरशयनं नीलकण्ठं सुरेशं।

विश्वाधारं स्फटिकसदृशं शुभ्रवर्णं शुभाङ्गम्।।

गौरीकान्तं त्रितयनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं।

वन्दे शम्भुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।


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छठ पूजा की शाम बोलें यह संकटमोचक यमराज मंत्र


हिन्दू धर्म में जहां यमराज को मृत्य यानी काल का देवता माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक यम का देवत्व रुप धर्मराज और पितृत्व रुप यमराज होता है। इसलिए कार्तिक माह में यम पूजा व दीपदान हर भय, चिंता, रोग कष्ट से मुक्त करने वाला माना गया है।

इसी माह की कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी सूर्य षष्ठी पर भी यमदेव का स्मरण संकटमोचक होता है। क्योंकि शास्त्रों में यमदेव सूर्य पूत्र बताए गए हैं। यम और सूर्य दोनों का संबंध काल से हैं। व्यावहारिक नजरिए से भी बुरे वक्त से बचने के लिए यम पूजा शुभ फल देती है।

खासतौर पर घर-परिवार, रिश्तों और जीवन को दीर्घ और संकटमुक्त रखने रखने के लिए इस दिन यम का विशेष मंत्र से स्मरण और दीप प्रज्जवलन का महत्व है। जानते हैं यमदेव की सरल पूजा विधि और विशेष मंत्र  -

यमदेव की सरल पूजा विधि -

- शाम को यम तर्पण या यम उपासना करें। यम तर्पण में नदी या तीर्थ में दक्षिण दिशा में मुंह कर हथेलियों में जल, तिल और कुश लेकर नम: यमाय या नम: धर्मराजाय बोलकर जल छोड़ें। इस दिन जनेऊधारी हो तो जनेऊ को माला की तरह पहने और काले, सफेद तिलों को उपयोग में लें।

- इसी तरह शाम को तिल के तेल से भरे 5 या 11 दीपक जलाकर उसकी गंध, अक्षत, पुष्प से पूजा करें और दक्षिण दिशा में मुंह करके यमदेवता का ध्यान कर मंदिर या तीर्थ में दीपदान करें। साथ ही नीचे लिखें यम गायत्री मंत्र का यथाशक्ति या कम से कम 108 बार स्मरण करें -

ऊँ सूर्यपुत्राय धीमहि

महाकालाय धीमहि

तन्नो यम: प्रचोदयात्।।

- यमदेवता की आरती कर काल, भय व रोग मुक्ति की कामना करें।
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सफलता चाहिए तो अवश्य करें यह उपाय

जीवन में सफलता के क्या माएने होते हैं यह वही इंसान बता सकते है जिसने कभी सफलता या असफलता का स्वाद चखा हो। सफलता पाने की इच्छा तो हर कोई रखता है लेकिन यह सबके नसीब में नहीं होती। यदि आप किसी कार्य में सफल होने चाहते हैं तो उसके लिए नीचे लिखा उपाय करें-

उपाय

बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पश्चिम दिशा में मुख करके बैठ जाएं और सामने बाजोट(पटिए) पर लाल कपड़ा बिछकर उस पर गेहूं से स्वस्तिक बनाएं। इस स्वस्तिक पर एक थाली रखकर उस पर गं लिखें। अब इस गं अर्थात गणेशजी के बीज मंत्र की पूजा कर इसके ऊपर श्वेतार्क गणपति एवं एक लघु नारियल रख दें। लघु नारियल व श्वेतार्क गणपति स्थापित कर उसके आस-पास गोलाकार घेरे के समान 7 बिंदिया कुंकुम की लगाएं एवं नीचे लिखे मंत्र को जपते हुए उस पर एक-एक लक्ष्मी कारक कौड़ी रख दें।

मंत्र- ऊँ सर्व सिद्धि प्रदोयसि त्वं सिद्धि बुद्धिप्रदो भव: श्री

अब सभी कौडिय़ों पर कुंकुम व चंदन से तिलक करें, चावल चढ़ाएं, फूल चढ़ाएं। अगले दिन किसी कुंवारी कन्या को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा देकर विदा करें। श्वेतार्क गणपति को पूजन स्थान पर स्थापित करें। कौडिय़ों एवं लघु नारियल को उसी वस्त्र में बांधकर जल में प्रवाहित कर दें।

चाहते हैं पैसा बढ़े और बचत भी..तो बोलें यह देवी मंत्र

पैसा यानी द्रव्य मुद्रा, लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। यह जीवन में अनेक विषय और कामनाओं की पूर्ति के लिये किए जाने वाले हर कर्म की गति को बरकरार रखता है। इसलिए जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने लिए धन अर्जन यानी अर्थ प्राप्ति धर्म माना गया है।

अगर आप भी धन प्राप्ति के रूप में ऐसे ही धर्म पालन में कठिनाई का सामना कर रहें हैं या परिवार, कारोबार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आमदनी कम और खर्चा अधिक होने की समस्या से जूझ रहे हैं तो दुर्गा सप्तशती के इस देवी मंत्र का ध्यान शुक्रवार या नवमी तिथि की शाम देवी की लाल चंदन, लाल फूल, नैवेद्य अर्पण व धूप-दीप के साथ पंचोपचार पूजा के बाद आर्थिक संकट दूर करने की कामना के साथ जरूर करें -

करोतु सा न: शुभहेतुरीश्वरी

शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद:।

- अंत में देवी की धूप व दीप आरती करें व धनलाभ की कामना करें। धार्मिक दृष्टि से यह देवी मंत्र विशेष बड़ा ही मंगलकारी व संकटनाशक माना गया है।

मंत्र, जो दिलाता है सुंदर पत्नी

सभी युवकों की इच्छा होती है कि उनकी जीवन संगिनी सुंदर व सुशील हो। जो पूरे परिवार की चहेती बने और सबका मन जीत ले। उसका संपूर्ण व्यक्तित्व सुंदरता का आइना हो। क्या आप भी इन्हीं गुणों से युक्त जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं तो दुर्गासप्तशती के अर्गला स्त्रोत का 24 वां श्लोक आपकी इस समस्या का तुरंत निदान कर सकता है। यह मंत्र बहुत चमत्कारी है तथा भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करता है।

मंत्र

पत्नीं मनोरमां देहि  मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।



कैसे करें जप?

प्रात:काल जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र की प्रतिदिन 5 माला जप करने से सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।

शंख की पूजा करें मार्गशीर्ष में, मिलेंगे मनोवांछित फल

  शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण का स्वरूप कहे जाने वाले माह मार्गशीर्ष (अगहन) का प्रारंभ 11 नवंबर, शुक्रवार को हो चुका है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस मास में शंख की पूजा का विशेष महत्व है। साधारण शंख को श्रीकृष्ण के पंचजन्य शंख के समान समझकर उसका पूजन करने से सभी मनोवांछित फल प्राप्त हो जाते हैं।

शंख पूजा का महत्व

सभी वैदिक कार्यों में शंख का विशेष स्थान है। शंख का जल सभी को पवित्र करने वाला माना गया है, इसी वजह से आरती के बाद श्रद्धालुओं पर शंख से जल छिड़का जाता है। साथ ही शंख को लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है, इसकी पूजा महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली होती है। इसी वजह से जो व्यक्ति नियमित रूप से शंख की पूजा करता है उसके घर में कभी धन अभाव नहीं रहता। ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन के समय शंख भी प्रकट हुआ था। विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है।



पंचजन्य पूजन मंत्र

पंचजन्य की पूजा भी भगवान श्रीहरि की आराधना के समान ही पुण्य देने वाली मानी गई है। विधि-विधान से इस माह शंख की पूजा की जानी चाहिए। जिस प्रकार सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, वैसे ही शंख का भी पूजन करें। अर्चना करते समय इस मंत्र का जप करें-



त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे।

निर्मित: सर्वदेवैश्च पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते।

तव नादेन जीमूता वित्रसन्ति सुरासुरा:।

शशांकायुतदीप्ताभ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते॥

પ્રેમમાં સફળતા મેળવવા માટેના આ છે અચૂક ઉપાયો

યુવાવસ્થામાં પ્રવેશ કરતાં જ યુવક- યુવતીઓમાં પરસ્પર આકર્ષણ સ્વાભાવિક છે. ક્યારેક – ક્યારેક આ આકર્ષણ પ્રેમમાં પલટાઇ જાય છે. પ્રેમ, મનુષ્યને ભગવાને આપેલી સૌથી સુંદર ભેંટ છે. જો પ્રેમ મર્યાદાની હદમાં રહી કરવામાં આવે તો તેમાં કોઇ દોષ નથી. નિ:સ્વાર્થ પ્રેમ જ સાચ્ચો પ્રેમ છે. જો તમે પણ કોઇને સાચો પ્રેમ કરતા હો અને પોતાના પ્રેમમાં સફળતા ચાહતા હો તો આ ઉપાય કરો.

ઉપાય

1- પ્રેમી યુગલને શનિવાર અને અમાસના દિવસે મળવું જોઇએ નહીં. આ દિવસોમાં મળવાથી એકબીજા પ્રત્યેનું આકર્ષણ ઓછુ થાય છે તે સાથે પ્રેમમાં સફળતા મળવાનો પણ સંદેહ રહે છે.

2 – પ્રેમી યુગલે એવો પ્રયાસ કરવો જોઇએ કે જે શુક્રવારે પૂનમના દિવસ હો ત્યારે ચોક્કસ મળે કારણ કે આ દિવસ અત્યંત શુભ હોય છે આ દિવસે મળવાથી પ્રેમ અને આકર્ષણ વધે છે.

3 – કન્યાએ પોતાના હાથમાં લીલી બંગડીઓ પહેરવી તથા પ્રત્યેક શુક્રવારનાં સફેદ વસ્ત્ર પહેરવા.

4 – યુવાનોએ પોતે પન્ના (એમરલ્ડ)ની વીંટી ધારણ કરવી જોઇએ.

5 – યુવાનોએ દરરોજ નીચે લખેલા મંત્રનો વિધિવિધાનથી જાપ કરવો જોઇએ -

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

6 – યુવતીઓએ પણ દરરોજ નીચે લખેલા મંત્રનો વિધિવિધાનથી જાપ કરવો જોઇએ -

ओम् कात्यायानी महाभागे महायोगिन्यधीश्वरीं।

नन्द गोप सुतं देवि पतिं में कुरुते नम:।!

અનોખો ઉપાય:માન્યમાં નહીં આવે,સરળ છે નસીબને બદલવું


જો તમે સરળ રીત દ્વારા તમારા નસીબને બદલવા માંગતા હો તો આ આર્ટિકલ ચોકકસ વાંચજો. કારણ કે તમને માન્યમાં નહીં આવે કે આટલી સરળતાથી પણ નસીબના સિતારાઓને બદલી શકાય છે, જાણો કેવી રીતે

જો તમે તમારા સિતારાઓને બદલવા માંગતા હો તો તમારા બેડ પર આરામ કરતા- કરતા પણ તમે બદલી શકો છો. હા, ચોક્કસ તમને આ વાત અજીબ તો લાગશે પણ આ વાત સાચી છે કારણ કે જ્યોતિષ અનુસાર અમુક એવા ઉપાય હોય છે જે બેડ પર સુઇને પણ કરી શકો છો જેનાથી તમારું નસીબ પણ બદલાઇ શકાય છે. જાણો કેવી રીતે?

- જો તમારી કુંડળીમાં સૂર્ય અશુભ હો અને તેનો કુપ્રભાવ તમને પરેશાન કરી રહ્યો હોય તો પલંગની નીચે તાંબાના પાત્રમાં પાણી અથવા તો ઓશીકાની નીચે લાલ ચંદન રાખો.

- જો ચંદ્રથી પરેશાન હો તો પલંગની નીચે ચાંદીના વાસણમાં જળ રાખો અને ચાંદીના આભૂષણ ધારણ કરો.

- જો કુંડળીમાં મંગળ અશુભ હો ચો પલંગની નીચે કાંસાના વાસણમાં પાણી રાખો અથવા સોના- ચાંદી મિશ્રિત આભુષણ તકિયાની નીચે રાખો.

- જો તમે બુધથી પરેશાન હો તો તકિયાની નીચે સોનાના આભુષણ રાખો.

- ગુરૂથી પરેશાન હો તો પલંગની નીચે પીળા વાસણમાં પાણી રાખો અથવા હળદરની ગાંઠને પીળા કપડામાં બાંધીને તકિયાની નીચે રાખો.

- શુક્રથી સંતપ્ત હો તો ચાંદીની માછલી બનાવીને તકિયાની નીચે રાખો અથવા પલંગની નીચે ચાંદીના પાત્રમાં જળ રાખો.

- શનિથી સંતપ્ત હો તો લોખંડના પાત્રમાં પલંગની નીચે પાણી રાખો કે તકિયાની નીચે લોખંડ કે નીલમ રાખો.

કુંડળીમાં શનિની સ્થિતિથી જાણો કેવો છે તમારો સ્વભાવ?



શનિ એક એવો ગ્રહ છે, જેની પ્રત્યે બધાના મનમાં ડર કાયમરહેતો હોય છે. તમારી કુંડળીમાં શનિ કયા ભાવમાં છે, તેનાથી તમારા આખાજીવનની દિશા, સુખ, દુઃખ વગેરે બધી જ બાબતો નક્કી થાય છે.

શનિ કયા ભાવમાં હોય તો તેને કેવું ફળ મળે છે. જાણો—

-લગ્નમાં શનિ હોય તો

જે વ્યક્તિની કુંડળીમાં શનિ પ્રથમ ભાવમાં હોય તે વ્યક્તિ રાજાની જેમ જીવન જીવનાર માનવામાં આવે છે. જો શનિ અશુભ ફળ આપનાર હોયતો વ્યક્તિ રોગી, ગરીબ અને ખરાબ કર્મો કરનાર હોય છે.

-દ્વિતીયભાવમાં શનિ હોય તો

દ્વિતીય ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ વિકૃતચહેરાવાળો, લાલચી, વિદેશમાંથી ધન પ્રાપ્ત કરનાર હોય છે.

-તૃતીયભાવમાં શનિ હોય તો

તૃતીય ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ સંસ્કારી, સુંદર શરીરવાળો, નીચ, આળસી અને ચતુર હોય છે. તેમને ઉપાય કરવો..

-ચોથા ભાવમાં શનિ હોયતો

જે વ્યક્તિની કુંડળીમાં શનિ ચોથા ભાવમાં હોય તે રોગી, દુઃખી, વાહનહીન, ધનહીન અને બુદ્ધિહીન હોય છે.

-પાંચમા ભાવમાં શનિ હોય તો

જન્મકુંડળીમાં પાંચમા ભાવમાં શનિ હોય તો તે વ્યક્તિ દુઃખી, પુત્રહીન, મિત્રહીનઅને ઓછી બુદ્ધિવાળો હોય છે.

-છઠ્ઠા ભાવમાં શનિ હોય તો

જેવ્યક્તિની કુંડળીમાં શનિ છઠ્ઠા ભાવમાં હોય તો તે વ્યક્તિ કામી, સુંદર, શરવીર, વધુ ખાનાર, કુટિલ સ્વાભાવનો, અનેક શત્રુઓને જીતનાર હોય છે.


શનિ એક એવો ગ્રહ છે, જેની પ્રત્યે બધાના મનમાં ડર કાયમ રહેતો હોય છે. તમારી કુંડળીમાં શનિ કયા ભાવમાં છે, તેનાથી તમારા આખા જીવનની દિશા, સુખ, દુઃખ વગેરે બધી જ બાબતો નક્કી થાય છે.

-સાતમા ભાવમાં શનિ હોય તો

સાતમા ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ રોગી, ગરીબ, કામી, ખરાબ વેશભૂષાધારી, પાપી અને નીચ હોય છે.

-આઠમા ભાવમાં શનિ હોય તો

આઠમા ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ કુષ્ટ કે ભંગદર રોગથી પીડિત, દુઃખી, અલ્પઆયુ, દરેક કામ કરવામાં અસક્ષમ હોય છે.

-નવમા ભાવમાં શનિ હોય તો

એવો વ્યક્તિ જેની કુંડળીમાં નવમા ભાવમાં શનિ હોય તે અધાર્મિક, ગરીબ, પુત્રહીન અને દુઃખી હોય છે.

-દશમા ભાવમાં શનિ હોય તો

દશમા ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ ધની, ધાર્મિક, રાજ્યમંત્રી કે ઉચ્ચપદ ઉપર આસીન(બેસેલો) હોય છે.

-અગિયારમા ભાવમાં શનિ હોય તો

જે વ્યક્તિની કુંડળીમાં અગિયારમા ભાવમાં શનિ હોય તો તે લાંબુ આયુષ્યવાળો, ધનીક, કલ્પનાશીલ, નિરોગી, બધા પ્રકારના સુખ પ્રાપ્ત કરનાર હોય છે.

-બારમા ભાવમાં શનિ હોય તો

બારમા ભાવમાં શનિ હોય તો વ્યક્તિ અશાંત મનવાળો, પતિત(ભ્રષ્ટ), વાચાળ, નિર્દયી, નિર્લજ્જ, વધુ ખર્ચ કરનાર હોય છે.

ધ્યાન રાખવું કે કુંડળી અધ્યયનમાં બધા ગ્રહોની સ્થિતિ અને અન્ય ગ્રહો સાથે સંબંધિત આધાર જ સચોટ ભવિષ્યવાણી કરી શકાય છે. આથી શનિની સ્થિતિ પ્રમાણે બતાવવમાં આવેલ અન્ય ગ્રહોની સ્થિતિ પણ કારણ બદલી શકે છે.

करें यह उपाय और हो जाइए टेंशन मुक्त




वर्तमान समय में हर कोई चिंताग्रस्त नजर आता है। किसी को नौकरी की चिंता है तो किसी को परिवार की। किसी को पैसे की चिंता है तो किसी को बेटे की। यानी हर व्यक्ति को किसी न किसी बात की चिंता अवश्य है।

यंत्र विज्ञान के अंतर्गत एक ऐसे यंत्र के बारे में बताया गया है जिसका प्रतिदिन पूजन करने से हर प्रकार की चिंता दूर हो जाती है। इस यंत्र को चिंतामणी यंत्र कहते हैं। इसे प्रतिष्ठित कर पूजा भी का जा सकती है साथ ही इसे धारण भी किया जा सकता है।

इस यंत्र को बनाने व धारण करने की विधि इस प्रकार है- किसी भी शुभ मुहूर्त में दिए यंत्र को भोजपत्र पर अनार की कलम का उपयोग करते हुए अष्टगंध से बनाएं। अब इस यंत्र को ताबीज में डालकर गले में धारण कर लें। इससे कुछ ही दिनों में आपकी सभी चिंताएं एवं परेशानियों का अंत हो जाएगा।

मृत संजीवनी है यह महामंत्र



धार्मिक दृष्टि से महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना से संकट मुक्ति का सबसे सिद्ध मंत्र माना जाता है। इस मंत्र के प्रभाव से अकाल मृत्यु और मृत्यु भय से रक्षा होती है। साथ ही इससे संतान, धन, यश और सुख-समृद्धि भी मिलती है। पारिवार भी रोग और शत्रु भय से मुक्त होता है। इस मंत्र जप के धार्मिक पक्ष से अलग जाकर विचार करें तो आखिर इस मंत्र के जप से रोग, भय कैसे दूर होते हैं। जानते हैं इसके पीछे छुपे विज्ञान को -

व्यावहारिक दृष्टि से इस मंत्र जप का विज्ञान यही है कि चूंकि मंत्र का मूल अर्थ होता है मनन और चिंतन। जब रोगी, दु:खी, पीडि़त व्यक्ति पूरी आस्था, विश्वास और लीन होकर अपने इष्ट के मंत्र जप करता है। तब ईश्वर के मनन के दौरान मिली सकारात्मक ऊर्जा उसके मन को चिंता, दु:ख और परेशानी से दूर ले जाती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही वह जीवन में नई ऊर्जा, उमंग और उत्साह महसूस करता है। इस दौरान परिवार, मित्रों और आत्मीयजनों का प्रेम, स्नेह और सहयोग हर तरह के संकट से बाहर निकाल देता है और जीवन जीने की नई दिशा मिल जाती है।

वास्तव में शरीर की आंतरिक और बाहरी शक्तियों का मजबूत और सक्रिय होना ही जीवन है। किंतु यही शक्तियाँ जब कमजोर होकर निष्क्रिय हो जाती है तो मृत्यु का कारण बनती है। महामृत्युंजय मंत्र इन शक्तियों को मानसिक और व्यावहारिक रुप से सबल बनाकर जीवन को गति देता है। यह कारण ही इस मंत्र के शास्त्रों में दिए गए मृत संजीवनी मंत्र नाम को सार्थक करता है।

इसलिए महामृत्युंजय मंत्र का जप आप स्वयं करें या आपके लिए परिवार के अन्य सदस्य कराएं। सृष्टि के नियम और अटल मृत्यु को ध्यान में रखकर विचार किया जाए तो भौतिक सुख को पाने और दु:खों के शमन के लिए यह मंत्र निश्चित रुप से शुभ फल देने वाला है।

हस्तरेखा: आपकी टेंशन बताती है...



ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हाथों की रेखाएं रोज बदलती है। यदि आप प्रतिदिन अपने हाथों को ध्यान से देखेंगे तो जान जाएंगे कि, आपकी हर छोटी-बड़ी परेशानियों की रेखाएं आपके हाथों में खींच चुकी हैं।

हमारे हाथों में छोटी-बड़ी, गहरी-हल्की असंख्य रेखाएं होती है। सभी रेखाओं का अपना अलग महत्व होता है और वे किसी ना किसी बात की ओर इशारा भी करती है।

हाथों में जो छोटी-छोटी महीन रेखाएं होती हैं, कुछ बहुत ध्यान से देखने पर दिखाई देती हैं वे सभी आपकी परेशानियों, टेंशन की ओर संकेत करती है। वे बताती है कि आप कितने परेशान है। जिसके हाथों में ऐसी बारिक-बारिक रेखाएं जितनी अधिक होगी वह व्यक्ति उतना ही अधिक परेशानियों से घिरा होता है। आपके दिमाग ही हर टेंशन की एक रेखा आपके हाथों पर अंकित हो जाती है।

इन लोगों के पास है आपकी किस्मत बदलने की ताकत

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है? भला कोई किसी की किस्मत कैसे बदल सकता है लेकिन ये बात सच है। कुछ लोग ऐसे होते है जो खुद तो भाग्यशाली होते ही है साथ ही लोगों की किस्मत बदलने की ताकत रखते हैं। ऐसे लोग अगर पैसों के लेनदेन या बिजनेस के बड़े सौदों में किसी के साथ रहे तो उसे बड़ा फायदा दिलाते हैं। अगर आपके साथ कुछ बुरा होने वाला है तब आपके साथ ऐसे किस्मती लोग हो तो वो बला भी टल जाती है। ऐसे लोगों को साथ रख कर काम करने से हर काम में सफलता मिलती है और किस्मत का साथ भी मिलता है।



जानें कैसे होते हैं ये लोग



- जिन लोगों के नीचे वाले होंठ पर तिल होता है वो लोग अपने लिए तो लकी होते ही है दुसरों के लिए भी भाग्यशाली होते हैं।

- जिन लोगों के हृदय पर तिल हो यानी गले से थोड़ा नीचे वक्ष स्थल पर हो तो ऐसे लोग भी दुसरों की किस्मत बदल देते हैं।

- ऐसी लड़कियां जिनकी आंखे बड़ी, सुंदर या कमल की तरह होती है वो दुसरों की किस्मत भी बदल देती है।

- ऐसी लड़कियां जिनकी कुंडली में लक्ष्मी योग बनता है वो दुसरों की किस्मत भी बदल देती है।

- ऐसी महिलाएं या लड़कियां जिनके बाल कमर तक लंबे हो वो बहुत भाग्यशाली होती है।

- जिन लोगों के आंख के नीचे तिल हो और वो उन्हे दिखता हो ऐसे लोग भी किस्मत बदलने वाले होतेे हैं।

- जिन लोगों के पैर या हथेली में मछली का निशान हो

- जिस महिला के पैर की मध्यमा अंगुठे से बड़ी हो वो बहुत भाग्यशाली होती है।

हर दिन व काम बनाना है सफल..तो इस एक ही मंत्र से करें नवग्रह का ध्यान

मानव और कुदरत का अटूट संबंध है। प्रकृति की हर हलचल मानव जीवन को और इंसान की हर गतिविधि प्रकृति को प्रभावित करती है। प्राचीन ऋषि मुनियों ने यही ज्ञान-विज्ञान जान-समझकर ग्रह-नक्षत्रों को सांसारिक जीवन के सुख-दु:,ख नियत करने वाला भी बताया।

यही नहीं इंसान का कुदरत के साथ गठजोड़ कायम रखने के लिए धार्मिक कर्मों द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की देव शक्तियों के रूप में पूजा और स्मरण का महत्व बताया गया है। जिसके मुताबिक हर ग्रह जीवन में विशेष सुख-दु:ख का कारक है। शास्त्रों में हर दिन ग्रह विशेष का खास मंत्रों से स्मरण सांसारिक कामनाओं को सिद्ध करने वाला बताया गया है।

इसी क्रम में नवग्रह उपासना के लिए हर रोज एक ऐसे शुभ मंत्र बोलने का महत्व भी बताया गया है, जिसके द्वारा नवग्रह सूर्य, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु का स्मरण एक ही साथ किया जा सकता है। यह हर दिन और काम को शुभ बनाने वाला व अनिष्ट से रक्षा करने वाला माना गया है। जानते हैं यह मंत्र -

- हर रोज यथासंभव नवग्रह मंदिर में हर ग्रह की पवित्र जल से स्नान कर गंध, अक्षत, फूल अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखा नवग्रह मंत्र का स्मरण करें या जप माला से 108 बार स्मरण कर मंगल कामनाओं के साथ मिठाई का भोग लगाकर आरती करें -

ऊँ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुत्व शुक्रश्च शनिश्च राहु: केतुश्च सर्वे प्रदिशन्तु शं मे।।

- किसी विद्वान ब्राह्मण से ग्रह विशेष के लिए विशेष पूजा सामग्री की जानकारी लेकर पूजा करना हर मनोरथसिद्धि करने वाला होता है।



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पैसा, इज्जत, शौहरत, सब मिलेगा इस मंत्र से

धन के अभाव में जीवन बेकार ही लगता है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो धन प्राप्ति के लिए अथक प्रयास करते हैं लेकिन फिर भी लक्ष्मी उनके पास ठहरती नहीं है। ऐसे लोग सदैव धन के अभाव के कारण परेशानी में ही जीवन व्यतीत करते हैं। श्रीसूक्त में वर्णित श्लोक का यदि विधि-विधान से पाठ किया तो देवी लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है और धन की कामना भी पूरी होती है। साथ ही इज्जत व शौहरत भी मिलती है। यह मंत्र तथा इसके जप के विधि इस प्रकार है-



मंत्र

कांसोस्मितां हिरण्यप्रकारामाद्र्रां ज्वलंतीं तृप्तां तपर्यन्तीम्।

पद्मेस्थितां पद्मवर्णों तामिहोप ह्ये श्रियम।।



जप विधि

- रोज सुबह स्नान आदि के बाद माता लक्ष्मी की तस्वीर को सामने रखें।

- मां लक्ष्मी को कमल पुष्प अर्पित करें।

- गाय के घी का दीपक लगाएं और मंत्र का जप पूर्ण श्रृद्धा व विश्वास के साथ करें।

- प्रतिदिन पांच माला जप करने से उत्तम फल मिलता है।

- आसन कुश का हो तो अच्छा रहता है।

- एक ही समय, आसन व माला हो तो यह मंत्र शीघ्र ही प्रभावशाली हो जाता है।

छोडि़ए शादी की टेंशन, करें यह उपाय

वर्तमान समय में समय पर विवाह न हो पाना एक आम समस्या बन चुकी है। इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे-जैसे विवाह योग्य युवक-युवती की उम्र बढ़ती जाती है। माता-पिता की चिंता भी बढ़ती जाती है। इस समस्या के निदान के लिए यदि नीचे लिखा छोटा सा उपाय किया जाए तो अतिशीघ्र विवाह हो जाता है। उपाय इस प्रकार है-

उपाय

विवाह योग्य युवक-युवती शुक्रवार के दिन भगवान शंकर के मंदिर में जाकर जलाभिषेक करें यानी जल चढ़ाएं। इसके बाद 108 आंकड़े के फूल चढ़ाते हुए ऊँ नम: शिवाय: मंत्र का जप मन ही मन में करें। इसके बाद 21 बेलपत्र चढ़ा कर शीघ्र विवाह के लिए प्रार्थना करें। यह उपाय कम से कम 7 शुक्रवार तक नियमित रूप से करें तो जल्दी ही विवाह संपन्न हो जाता है।

અનોખો ઉપાય:માન્યમાં નહીં આવે,સરળ છે નસીબને બદલવું

જો તમે સરળ રીત દ્વારા તમારા નસીબને બદલવા માંગતા હો તો આ આર્ટિકલ ચોકકસ વાંચજો. કારણ કે તમને માન્યમાં નહીં આવે કે આટલી સરળતાથી પણ નસીબના સિતારાઓને બદલી શકાય છે, જાણો કેવી રીતે



જો તમે તમારા સિતારાઓને બદલવા માંગતા હો તો તમારા બેડ પર આરામ કરતા- કરતા પણ તમે બદલી શકો છો. હા, ચોક્કસ તમને આ વાત અજીબ તો લાગશે પણ આ વાત સાચી છે કારણ કે જ્યોતિષ અનુસાર અમુક એવા ઉપાય હોય છે જે બેડ પર સુઇને પણ કરી શકો છો જેનાથી તમારું નસીબ પણ બદલાઇ શકાય છે. જાણો કેવી રીતે?



- જો તમારી કુંડળીમાં સૂર્ય અશુભ હો અને તેનો કુપ્રભાવ તમને પરેશાન કરી રહ્યો હોય તો પલંગની નીચે તાંબાના પાત્રમાં પાણી અથવા તો ઓશીકાની નીચે લાલ ચંદન રાખો.



- જો ચંદ્રથી પરેશાન હો તો પલંગની નીચે ચાંદીના વાસણમાં જળ રાખો અને ચાંદીના આભૂષણ ધારણ કરો.



- જો કુંડળીમાં મંગળ અશુભ હો ચો પલંગની નીચે કાંસાના વાસણમાં પાણી રાખો અથવા સોના- ચાંદી મિશ્રિત આભુષણ તકિયાની નીચે રાખો.



- જો તમે બુધથી પરેશાન હો તો તકિયાની નીચે સોનાના આભુષણ રાખો.



- ગુરૂથી પરેશાન હો તો પલંગની નીચે પીળા વાસણમાં પાણી રાખો અથવા હળદરની ગાંઠને પીળા કપડામાં બાંધીને તકિયાની નીચે રાખો.



- શુક્રથી સંતપ્ત હો તો ચાંદીની માછલી બનાવીને તકિયાની નીચે રાખો અથવા પલંગની નીચે ચાંદીના પાત્રમાં જળ રાખો.



- શનિથી સંતપ્ત હો તો લોખંડના પાત્રમાં પલંગની નીચે પાણી રાખો કે તકિયાની નીચે લોખંડ કે નીલમ રાખો.

શું તમે કાનના દર્દથી પરેશાન રહો છો! આ ઉપાય અજમાવો

જો તમે કાનના દર્દથી પીડાતા હો અથવા તમને કાન સંબંધી કોઇ અન્ય રોગ હોય અને ઘણા ઉપચારો કર્યા છતાં પણ કોઇ જ લાભ ના થઇ રહ્યો હોય તો આ એક નાનો પ્રયોગ પણ ચોક્કસ કરીને જુઓ.
એક કાળા રંગનો દોરો હાથમાં લો અને ऊँ द्वारवासनिभयां नम: મંત્રનો ઉચ્ચારણ કરતાં દોરામાં એક ગાંઠ લગાડો. આ પ્રકારે મંત્ર વાંચતા – વાંચતા એક- એક કરીને એમ અગિયાર ગાંઠ લગાડો અને તે દોરો પોતાના ગળામાં પહેરો. આ રીતે થોડા સમયમાં તમને કાનથી સંબંધિત દરેક રોગ દુર થઇ જશે. આ પ્રયોગ સવારનાં સમયે કરશો તો શ્રેષ્ઠ રહેશે.

દર શનિવારે આ 7 માંથી કોઇ 1 ઉપાય કરો, શનિ કૃપા વરસશે

આ માસની 15 નવેમ્બરે શનિ કન્યા રાશિ છોડીને તુલા રાશિમાં પ્રવેશ કરશે. જ્યોતિષ અનુસાર શનિનું રાશિ બદલવું એ બહુ મોટી ઘટના છે. જેનો દરેક વ્યક્તિ પર સીધો પ્રભાવ પડશે. આથી શનિને પ્રસન્ન કરવા માટે દરેક વ્યક્તિ કોઇને કોઇ ઉપાય ચોક્કસ કરો.

શનિની પ્રસન્નતા માટે ઘણા ઉપાય આપવામાં આવ્યા છે પરંતુ અમુક એવા સચોટ ઉપાય છે જેમાંથી તમે પણ જો કોઇ એક કરો તો શનિની કૃપા પ્રાપ્ત થાય છે. આ ઉપાય અત્યંત સરળ છે અને કોઇ પણ વ્યક્તિ તેને સરળતાથી અપનાવી શકે છે.

શનિને પ્રસન્ન કરવાના ઉપાય

- શનિદેવની પ્રતિમા પર તેલ ચઢાવો. તેલ ચઢાવતા પહેલા તેલમાં પોતાનું મો ચોક્કસ જુઓ.

- શનિ સ્તોત્રનો પાઠ કરો અને મંત્ર ऊं शं शनैश्चराय नम: મંત્રનો જાપ કરો.

- શનિને પ્રસન્ન કરવાનો સચોટ ઉપાય છે હનુમાનજીની આરાધના. પવનપુત્રના મંદિરમાં દરરોજ કે મંગળવાર- શનિવારે હનુમાન ચાલીસાનો પાઠ કરો.

- શનિવારના દિવસે હનુમાનજી સમક્ષ તેલનો દીવો લગાડો અને મંત્ર सीताराम નો જાપ કરો.

- શનિવારે શિવલિંગ પર દૂધ અને જળ અર્પણ કરો. બિલિપત્ર ચઢાવો.

- પીપળાના ઝાડમાં જળ ચઢાવો અને સાત પરિક્રમા કરો.

- શનિવારના દિવસે શનિની કાળી વસ્તુઓનું દાન કરો.

- આ સાત ઉપાયોમાંથી કોઇ એક ઉપાય પણ જો તમે શનિવારે કરો છો તો નિશ્ચિત તમને શનિની કૃપા મળે છે. ધ્યાન રાખો કે શનિ ખરાબ કર્મો કરનારા માટે બહુ ક્રુર છે આથી સારા કર્મોમાં ધ્યાન લગાડો અને સદકર્મ કરો